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hareshkumar


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कौन बनेगा दिल्ली का मुख्यमंत्री…

Posted On: 21 Dec, 2013  
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Junction Forum Others Politics में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

भारत को अमेरिका के इस तरह के रवैये का डटकर विरोध करना चाहिए और उसके राजनयिकों के साथ भी अगर यहां इसी तरह का व्यवहार हो तो शायद अक्ल ठिकाने आ जाये, जो सातवें आसमान पर है। अब वो भारत ना रहा जिसे आप सदा आंखें तरेरते रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की पांचवी मजबूत अर्थव्यवस्था में से है और आज की स्थिति में भारत की अनदेखी शायद ही कोई देश ज्यादा दिनों तक कर पायेगा। आज ना तो अमेरिका में इतनी कूबत है कि वह भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है और ना ही हथियारों का प्रतिबंध। एक से एक देश हैं जो भारत से साथ तकनीक से लेकर आर्थिक सहयोग के लिए मुंह बाये खड़े हैं। भारत विरोध तो कर रहा है लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि ये विरोध कितना सफल और प्रभावी रहता है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

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के द्वारा: sanjeevtrivedi sanjeevtrivedi

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

हरेश जी आपने बिहार की राजनीती में जो कुछ हो रहा है उसका अच्छा विश्लेषण किया है आज नितीश कुमार जो बिहार के मुख्यमंत्री हैं कभी बीजेपी के शासन काल में रेल मंत्री हुआ करते थे और आपने यह भी लिख ही दिया है तब वे नरेन्द्र मोदी को गुजरात से बहार आकर राष्ट्रीय राजनीति में आने का न्योता दे रहे थे और आज जब अपना पूरा देश वर्तमान केंद्र सरकार जो की कांग्रेस की है उसकी गलत और भ्रष्ट नीतियों के चलते भयंकर महंगाई की मार सह रहा है और नेता तो अमीर थे ही और अमीर होते जा रहे हैं इन नेताओं का एक ही फार्मूला है फूट डालो और राज करो कोई पिछड़ों की राजनीति करता है तो कोई अपने को धर्मनिरपेक्ष कहता है और सारी पार्टियाँ मिलकर बीजेपी को सांप्रदायिक पार्टी कहते हैं और बीजेपी भी अपने ऊपर लगा साम्प्रदायिकता का दाग कैसे धुले इसके लिए प्रयास करता नहीं दिखाई देता ऐसे में मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं किसी चुनाव में और हैरानी है की २० % मुस्लिमों की आबादी इस देश की राजनीती और चुनाव परिणामों का उलट-फेर कर दे रहीं हैं शायद इसीलिए ये सारी पार्टियाँ ये सारे नेता मुस्लिमों को अलग-अलग ढंग से खुश करने के प्रयास में लगे हैं अतः नरेन्द्र मोदी और बीजेपी को चुनावों में यदि बहुमत लाना है तो सबसे पहले तो उनको आने वाले लोकसभा चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को बढ़ाना होगा और जैसे नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुस्लिमों का वोट हासिल कर सके वैसे और प्रदेशों में बसे मुस्लिमों का वोट अगर भारतीय जनता पार्टी को दिला पाएंगे तो चुनाव परिणाम अलग होंगे। रही नीतीश की बात तो उनका मोदी विरोध केवल इसलिए है की वे अब कांग्रेस से हाथ मिला चुके हैं और हो सकता है अगले चुनाव में वे कांग्रेस के साथ गठबंधन भी कर लें पर जिस कांग्रेस से पूरे देश की जनता बेहाल है उसके साथ अगर नीतीश हाथ मिलाते हैं तो इसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा और हो सकता है जेडीयू नाम की की कोई पार्टी न बचे जैसे आज लालू यादव की पार्टी - आरजेडी बिहार में कुछ सीटें जीतकर सिमट कर रह गयी है अतः जो धोखा नीतीश ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर बिहार की जनता को दिया है उसका खामियाजा उनको अगले चुनाव में भुगतना ही पड़ेगा और उनकी बीजेपी पार्टी को कमजोर करने की साजिश काम नहीं आएगी बीजेपी चूंकि राष्ट्रीय पार्टी है और जेडीयू क्षेत्रीय पार्टी है, उसका क्या मुकाबला, बीजेपी से? अगर बीजेपी नरेन्द्र मोदी की अगुआई में ज्यादा सीटें लाने में कामयाब हो जाती है और ऐसा मेरा अपना विचार है और अभी तक जितने भी राजनितिक सर्वे देश में हुए हैं उनमें नरेन्द्र मोदी को ही देश कि जनता पसंद कर रही है। चूंकि नीतीश भी भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त हैं और यही कारण है की उन्होंने भ्रष्ट कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया है लेकिन जब उनको कांग्रेस धोखा देगी फिर उनको बीजेपी की याद जरुर आएगी और ऐसा होकर रहेगा ये मेरा मानना है क्यूंकि मैं भी बिहार का रहने वाला हूँ वहां की राजनीति को मैं भी करीब से देख रहा हूँ और जनता के बीच असंतोष भी दिखाई दे रहा है यह सुशासन का राग जो नितीश अलाप रहे हैं वह सब उनके मिडिया प्रबंधन और उसके लिए अकूत धन खर्च करने से ऐसी हवा बनाये हुए हैं, अब ज्यादा देर नहीं नितीश का पतन निश्चित है।

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

सुन्दर रचना , आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया

के द्वारा: ऋषभ शुक्ला ऋषभ शुक्ला

जब उन्हें यह सब बताया ही नहीं गया तो वे कैसे जानेंगे? तभी तो छोटी-छोटी बातों पर लोग एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हो रहे हैं। घर में ही छोटी-छोटी मासूम बच्चियों की अस्मत से खिलवाड़ हो रहा है। जिसके भरोसे बच्चों को छोड़ा जा रहा है, वही इसे दागदार कर रहे हैं। पर शिकायत किससे करें, कौन है गुनाहगार? क्या हम इन परिस्थितियों के खुद जिम्मेदार नहीं है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार बनने को भले ही हम वक्त की मजबूरी का नाम दें। कृषि से औद्योगिकीकरण के कारण हुई परिवर्तनों का प्रभाव कहें, लेकिन परिवारों पर इसका गहरा असर पड़ा है। इससे भला किसको इंकार है। दिल की गहराइयों तक पहुँचते सार्थक शब्द !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindrapandey yatindrapandey

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

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के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय हरेश कुमार जी, नमस्कार! आपने विस्तृत व्याख्या में कमोबेश सबकी खबर ले ली है ... पर इतना सा मानने से क्यों इनकार कर रहे हैं कि आज भी कांग्रेस ( या सोनिया गांधी - नेहरू परिवार का हिस्सा) अपनी कलाबाजियों में माहिर है बाकी सभी अनगिनत दल मिलकर भी कांग्रेस का कुछ बिगाड़ सकेंगे इसका भी उसे डर नहीं है..... नरेगा, मनरेगा की तरह मोबाइल नीति भी कांग्रेस के लिए वरदान ही साबित होगी ..... भ्रष्टाचार, महंगाई, लोकपाल, अन्ना और बाबा इन सबकी पहुँच वही तक है जो लोग केवल मोबाइल से वोट करते हैं. अब बी पी एल के हाथ में मोबाइल होगा तो वे भी एस एम् एस कर कांग्रेस को सबसे पोपुलर बता देंगे. भाजपा में घोर अंतर्कलह है. अन्य दल साथ आने से रहे ... आपने एक और विकल्प के प्रयास को अपने आलेख में जगह नहीं दी, जब बामपंथी सहित सभी क्षेत्रीय दल मायावती को प्रधान मंत्री बनाने में लगे थे, खैर वह प्रयास सफल नहीं हुआ.... ममता का हाँ कभी न - क्या कहता है - साथ रहने में ही भलाई है. हम आप ब्लॉग के माध्यम से या अख़बारों के माध्यम से चर्चा कर लेंगे, और क्या? आपके विस्तृत विवेचना पूर्ण आलेख के लिए बधाई! - जवाहर

के द्वारा: jlsingh jlsingh

प्रिय हरेशजी, आपने कांग्रेस द्वारा पीठ-पीछे-की-हरक़त पर सही समय पर टिपनी की | कांग्रेस कब नहीं चोरी यां सीनाजोरी से मुस्लिम वोट हांसिल करने से नहीं बाज आती | कांग्रेस का राज उम्दा - गुणात्मक तो हरगिज नहीं अपितु आंकड़ो व तादाद पर टिका हुआ है | कांग्रेस ने एक नया मजहब का अविष्कार किया है, कि राज करेगा भ्रष्टाचारी - पूंजीपति, नौकरशाही, गुर्गो और गुंडों कि इमदाद से | पहले से ही मस्जिद के मुल्लाओं, दुसरे प्रभावशाली और गुर्गो के पास रूपवाला रूपया पहुंचा दिया जाता है | इतना ही नहीं हार दिखने पर मुस्लिम यां कोई और दूसरी पार्टी खड़ी कर दी जाती है जैसे विधायक शोएब इकबाल कि लोकजन शक्ति पार्टी | केवल नाम मात्र से समाजवादी कहलाने वाली पार्टी बिना मुस्लिम - अल्पसंख्यक का कार्ड खेले कैसे उत्तर प्रदेश में जीत सकती थी | इतना ही नहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, कम्मूनिस्ट और दूसरी पार्टियाँ भी जनता कि पीठ पीछे समजौते करती है |यह भ्रष्ट पार्टिया प्रतिद्वंदी के वोट काटने के लिये कई डम्मी खिलाडियों को मैदान में उत्तर देते है तांकि वोह अपने मोहल्ले, जाती-पाती, कौम, भाषा, अल्प - संख्यक, हरिजन यां जनजाति का वोट अलग काट कर उनके प्रतिद्वंदी को हरा दें | इस तरह से अधिक लोकप्रिय प्रत्याशी भी धराशाई हो जाता है | इसके अलावा भूथों पर कब्ज़ा और गुंडों के बल पर वोट डलवाना यां न डालने देना आदि हरक़ते भी भ्रष्टाचारी नेताओं द्वारा इस्तेमाल कि जाती है | दरअसल मतदान चुनाव से अधिक धन और शतरंज का खेल रह गया है | पैसा फैंको तमाशा देखो | शीघ्र ही जनता लोकपालों की जगह सरकार-के-पाले सरकारीपालों की हरक़ते देखेगी और जनता की समस्याये और भ्रष्टाचार बढ़ जायेंगे और आम आदमी की सुनवाई कम हो जाएगी | आइये कुछ असाम की भी सुध लें | आज असाम में बंग्लादेशियों के सैटल हो जाने के कारण असामी, बोडो और दूसरी जनजातियाँ असुरक्षित महसूस करती है और उनका अस्तित्व खतरे में है परन्तु उनकी हालत यह है कि ' सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊ मैं ' राजीवजी का बनाया आई ऍम ड़ी टी एक्ट भी उल्टा बंग्लादेशी सैटलर को ज्यादा मुफीद हुआ | क्योंकि हितेश सैकिया और उनके बाद में आये नेताओं को तो अपना हित देखना था न कि असाम की मूल निवासी जनता का |

के द्वारा: ASK ASK

के द्वारा: munish munish

के द्वारा: hareshkumar hareshkumar




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